Friday, 13 November 2015

असर इस कदर है तेरी यादों का जेठ में भी नमी देर तलक रहती है। एक चाँद ही तो था आसमाँ के वजूद के लिए अमावस तेरे कारण बेसुध फ़लक रहता है। अनमोल सोने जैसी हँसी तेरी अब ये सोना बनिए के दुकानों में रहता है। दुनिया भर के झूठे रिश्ते, बस एक इश्क़ सच्चा अब ये सच अदालत के कटघरे में रहता है।

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