Friday, 13 November 2015

खिड़कियाँ वही है
परदे वही है
परदे के पीछे वो सूरत नही है ...
मकां वही है 
गलियाँ वही है
गलियों में वो पहले जैसी रौनक नही है ...
शामे वही है
बारिशे वही है
बारिशों में जुल्फों का भींगना नही है ...
दिन भी वही है
रातें वही है
रातों में पल -पल तडपना नही है ...
धडकने वही है
सासें वही है
सासों में सासों का घुलना नही है ...!!

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