Friday, 13 November 2015

तुम बीन सावन की बूंदे अंगारे है ;देखो ना !
तुम बीन बीते सारे वक़्त हारे है ; देखो ना !
अँधेरे कमरे में पायलों का शोर,
तकिये के नीचे तेरी खुशबू ,
सिलवटों में लिपटी,
मेरी धडकनों के साथ जिंदा, याद सारे है ; देखो ना !

No comments:

Post a Comment