हल्की-हल्की हवायें,
हल्की ठंठी सुबह।
खिडकियों से झांकता सूरज।
"उठो ना !"
और बस तुम..।
छम-छम, छम-छम,
इधर से उधर।
भींगे बालों से गिरती ,
हल्की ठंठी सुबह।
खिडकियों से झांकता सूरज।
"उठो ना !"
और बस तुम..।
छम-छम, छम-छम,
इधर से उधर।
भींगे बालों से गिरती ,
ओस की बुँदे।
चाय का कप।
"पेपर छोडो।"
और बस तुम..।
चेहरे पे लटकते कुछ केश।
बेलन के साथ-साथ
बजती चूड़ी।
कमर में फँसा
साड़ी का पल्लू।
"छोडो जल जाएगी। "
और बस तुम.... ।
चाय का कप।
"पेपर छोडो।"
और बस तुम..।
चेहरे पे लटकते कुछ केश।
बेलन के साथ-साथ
बजती चूड़ी।
कमर में फँसा
साड़ी का पल्लू।
"छोडो जल जाएगी। "
और बस तुम.... ।
No comments:
Post a Comment