लफ़ज़ो मे लिपटे सारे,
ज़ज्बात है तुम्हारे
ये और बात है कि,
ये बात है तुम्हारे ।
जो भी मिले है हम से,
वजह पूछता है खुशी के
कैसे कहूँ किसी से,
ये जो राज़ है हमारे ।
पहचान खो के अपनी,
तू जो दुनिया से लड़ता है
समझता हूँ खूब मैं भी,
क्यूँ ये हाल है तुम्हारे।
बोझ-सी लगे है,
ज़िंदगी भी अब तो
क्या खूब थे वो दिन भी,
वो जो साथ थे हमारे ।
तू जो गयी है जब से,
सब कुछ ख़तम हो जैसे
रो-रो अब कटे है,
दिन-रात भी हमारे ।
वो रोये जा रहे थे ,
मुझ से लिपट के उस दिन
सर रख दिया था कन्धों पे,
था हाथों में हाथ हमारे ।
पल-पल को जो जीया था
यूँ साथ में तुम्हारे
मर-मर के जी रहे है
हर पल बिन तुम्हारे।
लफ़ज़ो मे लिपटे सारे,
ज़ज्बात है तुम्हारे
ये और बात है कि,
ये बात है तुम्हारे ।
ज़ज्बात है तुम्हारे
ये और बात है कि,
ये बात है तुम्हारे ।
जो भी मिले है हम से,
वजह पूछता है खुशी के
कैसे कहूँ किसी से,
ये जो राज़ है हमारे ।
पहचान खो के अपनी,
तू जो दुनिया से लड़ता है
समझता हूँ खूब मैं भी,
क्यूँ ये हाल है तुम्हारे।
बोझ-सी लगे है,
ज़िंदगी भी अब तो
क्या खूब थे वो दिन भी,
वो जो साथ थे हमारे ।
तू जो गयी है जब से,
सब कुछ ख़तम हो जैसे
रो-रो अब कटे है,
दिन-रात भी हमारे ।
वो रोये जा रहे थे ,
मुझ से लिपट के उस दिन
सर रख दिया था कन्धों पे,
था हाथों में हाथ हमारे ।
पल-पल को जो जीया था
यूँ साथ में तुम्हारे
मर-मर के जी रहे है
हर पल बिन तुम्हारे।
लफ़ज़ो मे लिपटे सारे,
ज़ज्बात है तुम्हारे
ये और बात है कि,
ये बात है तुम्हारे ।
No comments:
Post a Comment