कुछ सोच कर 'वो' आज भी हैरान है,
मुझे भूलने की कोशिश मे 'वो नादान' है।
उसने कब का कहा था- दिल से चले गये तुम,
अरे जा ! आज तक तेरे दिल मे मेरी मौजूदगी के निशान है।
बड़ी सफाई से वो झूठ बोलने की आदी हो गयीं है,
दंग रह जाता हूँ देख के, सिसकती आखों को लपेटे मुस्कान है।
जितने करीब थे, कि मस्वीरा साँसों से साँसे करती थी,
अक्स की भी पहचान न हो, अब इतने फ़ासले दरम्यान है।
दंग रह जाता हूँ देख के, सिसकती आखों को लपेटे मुस्कान है।
जितने करीब थे, कि मस्वीरा साँसों से साँसे करती थी,
अक्स की भी पहचान न हो, अब इतने फ़ासले दरम्यान है।
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