इस शहर के शोर,
अनसुलझे सवालों,
पेचीदा रिश्तों के जिम्मेवारियों।
जहाँ खुद को भूला के
दूसरों के लिये जीते चले गए।
जिस भवँर में ना डूबते बना
ना तैर के पर करते।
न गलत को गलत कह सके
न सही को सही।
पहेली सुलझाते गए
खुद उलझते गए।
जब आँखों से सांचे में
आसूं मोम सा पिघला दिया।
आओ चले इस इन सब से दूर
उस भोर की लाली के पीछे
हरे घास के ओस पर
नंगे पाँव चले
कुछ देर अपने आप से बातें करे।
दोपहरी में चलते चलते
थक के नीम के पेड़ ने नीचे
कोयल की आवाज सुन सो जाये।
शाम को लॉन में लेट
देर तक 'उसकी' दुपट्टे से नीले
आकाश को देखे।
रात को फूटपाथ पर खोमोश
चलते जाए
जैसे उसका हाथ थामे
जा रहे है चाँद के नीले
रौशनी तले जन्मों से
गूंगे अहसासों को आवाज देने।
आओ वही चलते है।
अनसुलझे सवालों,
पेचीदा रिश्तों के जिम्मेवारियों।
जहाँ खुद को भूला के
दूसरों के लिये जीते चले गए।
जिस भवँर में ना डूबते बना
ना तैर के पर करते।
न गलत को गलत कह सके
न सही को सही।
पहेली सुलझाते गए
खुद उलझते गए।
जब आँखों से सांचे में
आसूं मोम सा पिघला दिया।
आओ चले इस इन सब से दूर
उस भोर की लाली के पीछे
हरे घास के ओस पर
नंगे पाँव चले
कुछ देर अपने आप से बातें करे।
दोपहरी में चलते चलते
थक के नीम के पेड़ ने नीचे
कोयल की आवाज सुन सो जाये।
शाम को लॉन में लेट
देर तक 'उसकी' दुपट्टे से नीले
आकाश को देखे।
रात को फूटपाथ पर खोमोश
चलते जाए
जैसे उसका हाथ थामे
जा रहे है चाँद के नीले
रौशनी तले जन्मों से
गूंगे अहसासों को आवाज देने।
आओ वही चलते है।