जहाँ नन्हे-नन्हे कदमो से,
गीली मिट्टियों पर निशान छोड़े थे
उस काठ के बक्से में जहाँ,
चुन-चुन के कुछ सामान छोड़े थे
रंग-बिरंगी तितलियों की पंखों ने,
जिन उंगलिओं पर रंगों के निशान छोड़े थे
आओ कुछ देर वहीँ थक के सो जाते है
चलो वहीँ खो जाते है...
जिन उंगलिओं पर रंगों के निशान छोड़े थे
आओ कुछ देर वहीँ थक के सो जाते है
चलो वहीँ खो जाते है...
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