Saturday, 7 November 2015

खाली-खाली-सा आसमान अधूरा 
अधूरे चाँद का होना 
याद है लेकिन ।
हाँ ! मैं चुप-चुप-सा बूत  बना 
तेरा बेबाक बोलना
याद है लेकिन ।
दुनिया की बड़ी-बड़ी बातों का गम नही
तेरी छोटी-छोटी बातों से फर्क पड़ना
याद है लेकिन ।
मेरी बेबसी तुम्हे सुन मुस्कुराना
तुम्हारी जिद्द की मिलने आ जाना
याद है लेकिन ।
सोचता रहा पुरे रास्ते तुमको
बेचैनी में तेरा भी राह तकना
याद है लेकिन ।
मैं, तुम, हल्की शाम तक तो ठीक था
खुले केशों का यूँ बारीश में भींगना
याद है लेकिन ।
अभी सोचा ही था मैं मुझसे मिल जाऊ बढ़ कर
तेरा बढ़ के आगे मुझसे लिपटना
याद है लेकिन ।
हर रोज कोशिश कर रहा हूँ सब भूल ही जाऊ
लबों से उन लबों का उस शाम मिलना
याद है लेकिन ।

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