Saturday, 6 February 2016

डरता हूँ मैं सच्चाई से,

हाँ, डरता हूँ मैं उजालो से

रहने दो मुझे झूठ के अंधेरो में। 

'सच' इतना खौफनाक है ,

'उजाले' इतने डरावने है।

रिस्तो को तोड़ते 'सच' तो कहीं

अपनो से दूर करते 'उजाले'

रहने दो मुझे झूठ के अंधेरो मे।

या समझो इसे 'सपनो की दुनिया'

सपने भी तो रात के अंधेरो मे आते है

सपने भी तो झूठे होते है।

रहने दो मुझे सपनो को दुनिया मे।

तू गया ही कब था जो मुझे रुलाएगा

याद आ-आ के मुझे सताएगा

रखा है तुझे बाँध के सपनो की दुनिया मे

न जाने दूँगा कभी, सोने दे कुछ देर और मुझे।

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